Friday, June 18, 2010

एक रिश्ता प्यारा सा..........


आज ये मेरे इस ब्लॉग की पहली पोस्ट है। मै आज सुबह से ये सोच रहा था की क्या मेरा इस ब्लॉग को यह नाम देना उचित है। लेकिन जब मैंने अपनी यह पहली पोस्ट को लिखने का ख्याल किया तो मुझे पूरी तरह से संतुष्टि मिल गयी की मैंने जो नाम दिया वह सही ही दिया है। चलो ये तो बात हुई मेरे इस ब्लॉग के शीर्षक की, अब आते है मुद्दे पर। एक छोटा सा शब्द है - "रिश्ता"। लेकिन वास्तव में यह शब्द जितना छोटा दिखाई देता है उतना है नहीं। आज की जो ये दुनिया है उसमे भले ही आप किसी भी व्यक्ति को क्यों न ले ले, सभी इसी रिश्ते नामक शब्द की अहमियत के लिए ही इस पर अपनी जान छिड़कते है। इसका महत्त्व कोई आज से नहीं है, बल्कि इस शब्द की उत्पत्ति तो उस समय ही हो गयी थी जब इस पृथ्वी की उत्पत्ति हुई थी। कहा जाता है की हम सभी पृथ्वीवासी मनु की संतान है। यह रिश्ता तो देखिये यही से प्रारंभ हो गया। इस बात से एक बात तो सिद्ध हो गयी की मनु सभी के पिताजी है। रिश्तो की इस दुनिया में विचरण करने वाले सभी लोग इस बात से शायद पूरी तरह सहमत होंगे की बिना रिश्ते के दुनिया में लोगो में आपस में समबंधो का स्थापित होना बड़ा मुस्किल है। इन रिश्तो की दुनिया ने हम सभी का जीवन सरल कर दिया है। हम दूर क्यों जाए हमारे साथ ही आजमा कर देखिये न की क्या हम इसे ही हर व्यक्ति से जानकारी बढ़ा लेते है, हम हर व्यक्ति से बात करने से पहले इस बात का विशेष ध्यान रखते है की क्या वो हमें जानता है की नहीं? इस प्रकार इस रिश्तो की दुनिया में ही मानव जीवन बसता है अन्यथा मानव जीवन जानवर जीवन में तब्दील हो जाता जो की इस मालिक को कभी मंजूर न थी और इसी लिए उसने रिश्ते नामक एक पोधे को इस मानावालोक में भेज दिया । हम इस पर विस्तार से चर्चा अपनी अगली सभा में करेंगे। इसी उम्मीद के साथ फिर मिलेंगे

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