
आज है फादर्स दे। जी हाँ एक दिन जब एक पुत्र का कर्तव्य जो की उसका अपने पिता के प्रति होता है को वो याद करे और उसे पूरा करे। हरेक पिता यह सोचता है की उसकी औलाद उसका नाम रोशन करे और उसकी बुदापे की लाठी बने पर आज जिस प्रकार का समाज है, जिस प्रकार का माहौल है क्या वो सब जो की एक पिता अपने पुत्र से उम्मीद करता है उसे मिला रहा है और क्या उसे भविष्य में मिल पायेगा? आज पुरे देश में फथार्स डे का चर्चा है लेकिन ये चर्चा तभी सार्थक होगी जब हम इस बात का हल पहले निकाल लेंगे की आज का एक बेटा अपने बाप के साथ क्या सुलूक कर रहा है और उसे क्या व्यवहार करना चाहिए। एक बाप जो अपने बेटे को चलाना सिखाता है। जो उसे कमाकर खिलाता है उसे वह बेटा बीच मझधार में उस वक्त छोड़ देता है जब उस बाप को अपने लाडले की सबसे ज्यादा जरुरत महसूस होती है.जिस पिटा ने इस जमीं पर उसको पहला कदम रखना सिखाया उसी बाप के जीवन के अंतिम दिनों में उसका बेटा उसे अकेले तड़पने के लिए छोड़ देता है तो बताओ की उस बाप पर क्या गुजरती होगी। आज लाखो इसे पिता है जिनके साथ इस प्रकार की घटना हुई है। मई कहता हु की पिता पुत्र से बदकार नजदीक रिश्ता कोई और नहीं है और इसी नजदीकी रिश्ते के ये सिले और दुसरे रिश्तो के लिए एक अभिशाप होंगे। मै तो आप सभी से यही कहना चाहूँगा की जब तक हम इस समस्या का हल नहीं ढूंढ लेते तब तक हमारा फथार्स डे मनाना बेकार है। यदि इस प्रकार की बाते होती रही तो वो दिन भी दूर नहीं जब संसकारो की अर्थी उठेगी और उन्हें कन्धा देने वाला भी कोई न होगा।
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