Sunday, September 12, 2010

Tuesday, June 22, 2010

ये रिश्ता क्या कहलाता है.........


एक दिन मै रश्ते से गुजर रहा था तभी मैंने देखा की एक बूढी औरत सामने से आ रही थी और उसके सिर पर थी एक लकडियो की भरी गठरी। उस औरत को देखने से लगता था की वह गठरी का बोझ उठाने में असमर्थ है लेकिन फिर भी वह उसका बोझ उठा रही थी। लेकिन जब वह औरत मेरे पास से गुजारी तो मैंने उसे रोककर उसकी गठरी यह कहते हुए ले ली की माताजी इस गठरी का बोझ उठाने में आप की असमर्थता मुझसे देखि नहीं जा रही है और इसी कारण वश यह गठरी मै उठा रहा हु और आपके घर तक इसे मै छोड़ दूंगा। और इस तरह से मैंने वो गठरी उसके घर तक उसके साथ साथ चलकरपहुंचा दी। इसके बाद कुछ लोग जो मेरी इस हरकत को देख रहे थे उन्होंने मुझसे पूछा की मैंने उस औरत की सहायता क्यों की जबकि मै तो उसे जानता तक नहीं। इसके बाद मैंने उन महाशय से बड़े प्रेम से कहा की बंधू, आज हमारी यही कमी अत्याचारों को जन्म दे रही है क्योकि जो आपराधिक तत्व होते है वे सिर्फ यही समझकर की किसी से गलत व्यवहार करने पर और कोई तो बोलेगा नहीं सो जैसा चाहे वैसा करलो। वो औरत मुसीबत में थी पर इसी कारन की कहने पर भी कोई सहायता तो करेगा नहीं सो उसने किसी को नहीं कहा पर में उसकी सहायता की पुकार उसकी आँखों में ही समझ गया सो मैंने उसकी मदद कर दी। और इस प्रकार मदद करना कोई गलत काम थोड़े ही है। हम भारतीय तो सारे संसार को अपना परिवार मानते है तो इस प्रकार वह बूढी अम्मा भी इसी परिवार की सदस्य हुई । इस प्रकार उन बंधू का यह प्रश्न की ये रिश्ता क्या कहलाता है? दूर हुआ। और इस प्रकार के इंसानियत के कार्य हमें जिन्दगी में नीचा नहीं बनाते है। कई मेरे पढ़े लिखे साथी सोचते होंगे की जब वो कोलेज में होते है और यदि उस समय उन्हें कोई परोपकार का कार्य करने का मौका मिलाता है तो वे नहीं कर सकते क्योकि एसा करने से अन्य साथी उनकी मजाक बना लेते है या लड़कियों के बीच उनकी इमेज खराब हो जायेगी तो मै उनको बता देना चाहूँगा की उन्हें वे परोपकार के कार्य बेझिझक करने चाहिए। आपके मित्रो के बीच आपकी इमाज और अच्छी हो जाएगी। और आपका रिश्ता वास्तव में एक सही व्यक्तित्व के रूप में लोगो से जुड़ जाएगा।

Sunday, June 20, 2010

क्यों मिलते है सभी रिश्ते किसी किसी को.....




आज मै जब उठा तो मेरी मम्मी ने मुझे प्यार से उठाया और उनका वो प्रेम से मुझे नींद से जगाने का तरीका मुझे इतना अच्छा लगा की मेरा सारा का सारा दिन भी बहुत अच्छा लगा। और इसके बाद सुबह आठ बजे पापाजी का फ़ोन आया और उनसे भी मेरी प्यार भरी बाते हुई। इससे भी मेरे मन को बहुत सुकून मिला। लेकिन इसी के साथ मेरे मन में एक और सवाल उठा की क्या ये सभी रिश्ते सभी लोगो के नसीब में होते है। क्या सभी के भाग्य में मम्मी का प्यार है? क्या सभी के नसीब में पापाजी का दुलार है? और यही प्रश्न मैंने कई लोगो से पूछा और सभी का उत्तर था "ना"। यह सोचकर मुझे बड़ा दुःख हुआ। क्योकि अभी मै भी एक बच्चा ही हु सो मुझ में भी अभी इतनी समझ नहीं है। लेकिन इसके बाद मुझे कुछ मेरी पुरानी बाते याद आ गयी जिसके बाद मुझे यह समझ में आ गया की जिन लोगो को सभी रिश्ते नसीब नहीं होते वे लोग कभी न कभी तो उस रिश्ते के लिए जरुर तरसते होंगे। और एक बात तो मेरी समझ में पूरी तरह समझ आ गयी की ये रब सभी को किसी किसी रिश्ते से जुदा जरुर करता है। कुछ भाग्यशाली लोग ही होते है जिन्हें सभी रिश्तो का गिफ्ट मिलता है। मै भी उन अभाग्यशाली लोगो में से एक हु जिन्हें कुदरत ने बचपन में सभी रिश्तो का शुख नहीं दिया। अर्थात कुछ रिश्तो से मुझे भी अछूता रख दिया था लेकिन आज की तारीख में मैंने सभी रिश्तो को समझाने में कोई भूल नहीं की और फलस्वरूप आज मै सभी रिश्तो की अहमियत को जान गया हु और उन्हें पूर्ण श्रद्धा से निभा रहा हूँ । और जिंदगी को आनंद माय तरीके से जी रहा हूँ । और मै आप सभी से यही कहना चाहता हूँ की इश्वर ने जिन पवित्र रिश्तो से आपको बेदखल कर दिया है उन्हें पूरी सार्द्ध के साथ जोड़े और पूरी निस्वार्थ भावना से उन्हें निभाए और फिर देखिये की क्या कमाल होता है आपकी जिन्दगी में। आप एक बात का सर्वे करके जरुर देखना की कौन लोग अधिक सुखी है जिन्हें सभी रिश्ते बागवान से मिले है वो या फिर जिन्होंने खुद इन पवित्र रिश्तो की की नीव राखी है वो। अपने जवाब मुझे कमेन्ट के रूप में जरुर भेजिएगा.


पिता से प्यारा नाता.........


आज है फादर्स दे। जी हाँ एक दिन जब एक पुत्र का कर्तव्य जो की उसका अपने पिता के प्रति होता है को वो याद करे और उसे पूरा करे। हरेक पिता यह सोचता है की उसकी औलाद उसका नाम रोशन करे और उसकी बुदापे की लाठी बने पर आज जिस प्रकार का समाज है, जिस प्रकार का माहौल है क्या वो सब जो की एक पिता अपने पुत्र से उम्मीद करता है उसे मिला रहा है और क्या उसे भविष्य में मिल पायेगा? आज पुरे देश में फथार्स डे का चर्चा है लेकिन ये चर्चा तभी सार्थक होगी जब हम इस बात का हल पहले निकाल लेंगे की आज का एक बेटा अपने बाप के साथ क्या सुलूक कर रहा है और उसे क्या व्यवहार करना चाहिए। एक बाप जो अपने बेटे को चलाना सिखाता है। जो उसे कमाकर खिलाता है उसे वह बेटा बीच मझधार में उस वक्त छोड़ देता है जब उस बाप को अपने लाडले की सबसे ज्यादा जरुरत महसूस होती है.जिस पिटा ने इस जमीं पर उसको पहला कदम रखना सिखाया उसी बाप के जीवन के अंतिम दिनों में उसका बेटा उसे अकेले तड़पने के लिए छोड़ देता है तो बताओ की उस बाप पर क्या गुजरती होगी। आज लाखो इसे पिता है जिनके साथ इस प्रकार की घटना हुई है। मई कहता हु की पिता पुत्र से बदकार नजदीक रिश्ता कोई और नहीं है और इसी नजदीकी रिश्ते के ये सिले और दुसरे रिश्तो के लिए एक अभिशाप होंगे। मै तो आप सभी से यही कहना चाहूँगा की जब तक हम इस समस्या का हल नहीं ढूंढ लेते तब तक हमारा फथार्स डे मनाना बेकार है। यदि इस प्रकार की बाते होती रही तो वो दिन भी दूर नहीं जब संसकारो की अर्थी उठेगी और उन्हें कन्धा देने वाला भी कोई न होगा।

Friday, June 18, 2010

एक रिश्ता प्यारा सा..........


आज ये मेरे इस ब्लॉग की पहली पोस्ट है। मै आज सुबह से ये सोच रहा था की क्या मेरा इस ब्लॉग को यह नाम देना उचित है। लेकिन जब मैंने अपनी यह पहली पोस्ट को लिखने का ख्याल किया तो मुझे पूरी तरह से संतुष्टि मिल गयी की मैंने जो नाम दिया वह सही ही दिया है। चलो ये तो बात हुई मेरे इस ब्लॉग के शीर्षक की, अब आते है मुद्दे पर। एक छोटा सा शब्द है - "रिश्ता"। लेकिन वास्तव में यह शब्द जितना छोटा दिखाई देता है उतना है नहीं। आज की जो ये दुनिया है उसमे भले ही आप किसी भी व्यक्ति को क्यों न ले ले, सभी इसी रिश्ते नामक शब्द की अहमियत के लिए ही इस पर अपनी जान छिड़कते है। इसका महत्त्व कोई आज से नहीं है, बल्कि इस शब्द की उत्पत्ति तो उस समय ही हो गयी थी जब इस पृथ्वी की उत्पत्ति हुई थी। कहा जाता है की हम सभी पृथ्वीवासी मनु की संतान है। यह रिश्ता तो देखिये यही से प्रारंभ हो गया। इस बात से एक बात तो सिद्ध हो गयी की मनु सभी के पिताजी है। रिश्तो की इस दुनिया में विचरण करने वाले सभी लोग इस बात से शायद पूरी तरह सहमत होंगे की बिना रिश्ते के दुनिया में लोगो में आपस में समबंधो का स्थापित होना बड़ा मुस्किल है। इन रिश्तो की दुनिया ने हम सभी का जीवन सरल कर दिया है। हम दूर क्यों जाए हमारे साथ ही आजमा कर देखिये न की क्या हम इसे ही हर व्यक्ति से जानकारी बढ़ा लेते है, हम हर व्यक्ति से बात करने से पहले इस बात का विशेष ध्यान रखते है की क्या वो हमें जानता है की नहीं? इस प्रकार इस रिश्तो की दुनिया में ही मानव जीवन बसता है अन्यथा मानव जीवन जानवर जीवन में तब्दील हो जाता जो की इस मालिक को कभी मंजूर न थी और इसी लिए उसने रिश्ते नामक एक पोधे को इस मानावालोक में भेज दिया । हम इस पर विस्तार से चर्चा अपनी अगली सभा में करेंगे। इसी उम्मीद के साथ फिर मिलेंगे